महाभारत 7.157.2
तस्मिन्हते हता हि स्युः सर्वे पाण्डवसृञ्जयाःएकवीरवधे कस्मान्न युद्धे जयमादधत्
tasminhate hatā hi syuḥ sarve pāṇḍavasṛñjayāḥekavīravadhe kasmānna yuddhe jayamādadhat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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