महाभारत 7.157.33
कर्ण कर्ण महेष्वास रणेऽमितपराक्रमनान्यस्य शक्तिरेषा ते मोक्तव्या जयतां वर
karṇa karṇa maheṣvāsa raṇe'mitaparākramanānyasya śaktireṣā te moktavyā jayatāṃ vara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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