महाभारत 7.159.29
तामस्य वाचं देवाश्च ऋषयश्च महात्मनःसर्वसैन्यानि चाक्षुद्राः प्रहृष्टाः प्रत्यपूजयन्
tāmasya vācaṃ devāśca ṛṣayaśca mahātmanaḥsarvasainyāni cākṣudrāḥ prahṛṣṭāḥ pratyapūjayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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