महाभारत 7.159.40
तत्तथा निद्रया भग्नमवाचमस्वपद्बलम्कुशलैरिव विन्यस्तं पटे चित्रमिवाद्भुतम्
tattathā nidrayā bhagnamavācamasvapadbalamkuśalairiva vinyastaṃ paṭe citramivādbhutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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