महाभारत 7.159.42
ततः कुमुदनाथेन कामिनीगण्डपाण्डुनानेत्रानन्देन चन्द्रेण माहेन्द्री दिगलंकृता
tataḥ kumudanāthena kāminīgaṇḍapāṇḍunānetrānandena candreṇa māhendrī digalaṃkṛtā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें