महाभारत 7.16.39
आहूतो न निवर्तेयमिति मे व्रतमाहितम्संशप्तकाश्च मां राजन्नाह्वयन्ति पुनः पुनः
āhūto na nivarteyamiti me vratamāhitamsaṃśaptakāśca māṃ rājannāhvayanti punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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