महाभारत 7.161.13
तेषामस्त्राणि सर्वेषामुत्तमास्त्रविदां वरःकदर्थीकृत्य राजेन्द्र शरवर्षैरवाकिरत्
teṣāmastrāṇi sarveṣāmuttamāstravidāṃ varaḥkadarthīkṛtya rājendra śaravarṣairavākirat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें