महाभारत 7.161.39
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौबलःसोदर्याश्च यथा मुख्यास्तेऽरक्षन्द्रोणमाहवे
duryodhanaśca karṇaśca śakuniścāpi saubalaḥsodaryāśca yathā mukhyāste'rakṣandroṇamāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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