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महाभारत 7.162.11
तेषु सर्वेष्वनीकेषु व्यतिषक्तेष्वनेकशःस्वे स्वाञ्जघ्नुः परे स्वांश्च स्वे परांश्च परान्परे
teṣu sarveṣvanīkeṣu vyatiṣakteṣvanekaśaḥsve svāñjaghnuḥ pare svāṃśca sve parāṃśca parānpare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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