महाभारत 7.162.32
ततो दुर्योधनः कर्णो द्रोणो दुःशासनस्तथापाण्डवैः समसज्जन्त चतुर्भिश्चतुरो रथाः
tato duryodhanaḥ karṇo droṇo duḥśāsanastathāpāṇḍavaiḥ samasajjanta caturbhiścaturo rathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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