महाभारत 7.164.59
द्रोणास्त्रेण महाराज वध्यमानाः परे युधिनात्रसन्त रणे द्रोणात्सत्त्ववन्तो महारथाः
droṇāstreṇa mahārāja vadhyamānāḥ pare yudhinātrasanta raṇe droṇātsattvavanto mahārathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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