महाभारत 7.164.96
तस्मात्तं परिपप्रच्छ नान्यं कंचिद्विशेषतःतस्मिंस्तस्य हि सत्याशा बाल्यात्प्रभृति पाण्डवे
tasmāttaṃ paripapraccha nānyaṃ kaṃcidviśeṣataḥtasmiṃstasya hi satyāśā bālyātprabhṛti pāṇḍave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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