महाभारत 7.17.27
ततस्त्रिगर्तराट्क्रुद्धस्तानुवाच महारथान्अलं द्रुतेन वः शूरा न भयं कर्तुमर्हथ
tatastrigartarāṭkruddhastānuvāca mahārathānalaṃ drutena vaḥ śūrā na bhayaṃ kartumarhatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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