महाभारत 7.17.29
नावहास्याः कथं लोके कर्मणानेन संयुगेभवेम सहिताः सर्वे निवर्तध्वं यथाबलम्
nāvahāsyāḥ kathaṃ loke karmaṇānena saṃyugebhavema sahitāḥ sarve nivartadhvaṃ yathābalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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