महाभारत 7.17.31
ततस्ते संन्यवर्तन्त संशप्तकगणाः पुनःनारायणाश्च गोपालाः कृत्वा मृत्युं निवर्तनम्
tataste saṃnyavartanta saṃśaptakagaṇāḥ punaḥnārāyaṇāśca gopālāḥ kṛtvā mṛtyuṃ nivartanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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