महाभारत 7.170.12
यथा शिलोच्चये शैलः सागरे सागरो यथाप्रतिहन्येत राजेन्द्र तथासन्कुरुपाण्डवाः
yathā śiloccaye śailaḥ sāgare sāgaro yathāpratihanyeta rājendra tathāsankurupāṇḍavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें