महाभारत 7.170.29
भीष्मद्रोणार्णवं तीर्त्वा संग्रामं भीरुदुस्तरम्अवसत्स्याम्यसलिले सगणो द्रौणिगोष्पदे
bhīṣmadroṇārṇavaṃ tīrtvā saṃgrāmaṃ bhīrudustaramavasatsyāmyasalile sagaṇo drauṇigoṣpade
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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