महाभारत 7.170.48
पश्यध्वं मे दृढौ बाहू नागराजकरोपमासमर्थौ पर्वतस्यापि शैशिरस्य निपातने
paśyadhvaṃ me dṛḍhau bāhū nāgarājakaropamāsamarthau parvatasyāpi śaiśirasya nipātane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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