महाभारत 7.170.7
सर्वानेतान्हनिष्यामि यदि योत्स्यन्ति मां रणेसत्यं ते प्रतिजानामि परावर्तय वाहिनीम्
sarvānetānhaniṣyāmi yadi yotsyanti māṃ raṇesatyaṃ te pratijānāmi parāvartaya vāhinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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