महाभारत 7.172.28
दृष्ट्वा तु पाण्डवीं सेनां दह्यमानां महाहवेप्रहृष्टास्तावका राजन्सिंहनादान्विनेदिरे
dṛṣṭvā tu pāṇḍavīṃ senāṃ dahyamānāṃ mahāhaveprahṛṣṭāstāvakā rājansiṃhanādānvinedire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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