महाभारत 7.172.38
हताविति तयोरासीत्सेनयोरुभयोर्मतिःतरसाभ्यागतौ दृष्ट्वा विमुक्तौ केशवार्जुनौ
hatāviti tayorāsītsenayorubhayormatiḥtarasābhyāgatau dṛṣṭvā vimuktau keśavārjunau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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