महाभारत 7.172.73
तस्मै वरानचिन्त्यात्मा नीलकण्ठः पिनाकधृक्अर्हते देवमुख्याय प्रायच्छदृषिसंस्तुतः
tasmai varānacintyātmā nīlakaṇṭhaḥ pinākadhṛkarhate devamukhyāya prāyacchadṛṣisaṃstutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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