महाभारत 7.172.9
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
युवराजे हते चैव वृद्धक्षत्रे च पौरवेइष्वस्त्रविधिसंपन्ने मालवे च सुदर्शने
yuvarāje hate caiva vṛddhakṣatre ca pauraveiṣvastravidhisaṃpanne mālave ca sudarśane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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