महाभारत 7.173.18
तस्मै नमस्तु कुर्वन्तो देवास्तिष्ठन्ति वै दिविये चान्ये मानवा लोके ये च स्वर्गजितो नराः
tasmai namastu kurvanto devāstiṣṭhanti vai diviye cānye mānavā loke ye ca svargajito narāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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