महाभारत 7.173.31
वृषाङ्कं वृषभोदारं वृषभं वृषभेक्षणम्वृषायुधं वृषशरं वृषभूतं महेश्वरम्
vṛṣāṅkaṃ vṛṣabhodāraṃ vṛṣabhaṃ vṛṣabhekṣaṇamvṛṣāyudhaṃ vṛṣaśaraṃ vṛṣabhūtaṃ maheśvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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