महाभारत 7.173.41
न सुरा नासुरा लोके न गन्धर्वा न राक्षसाःसुखमेधन्ति कुपिते तस्मिन्नपि गुहागताः
na surā nāsurā loke na gandharvā na rākṣasāḥsukhamedhanti kupite tasminnapi guhāgatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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