महाभारत 7.173.72
आयुरारोग्यमैश्वर्यं वित्तं कामांश्च पुष्कलान्स ददाति मनुष्येभ्यः स चैवाक्षिपते पुनः
āyurārogyamaiśvaryaṃ vittaṃ kāmāṃśca puṣkalānsa dadāti manuṣyebhyaḥ sa caivākṣipate punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें