महाभारत 7.18.3
पश्य मेऽस्त्रबलं घोरं बाह्वोरिष्वसनस्य चअद्यैतान्पातयिष्यामि क्रुद्धो रुद्रः पशूनिव
paśya me'strabalaṃ ghoraṃ bāhvoriṣvasanasya caadyaitānpātayiṣyāmi kruddho rudraḥ paśūniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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