महाभारत 7.19.26
अनिष्टदर्शनं दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नमवस्थितम्क्षणेनैवाभवद्द्रोणो नातिहृष्टमना इव
aniṣṭadarśanaṃ dṛṣṭvā dhṛṣṭadyumnamavasthitamkṣaṇenaivābhavaddroṇo nātihṛṣṭamanā iva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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