महाभारत 7.19.35चूडामणिषु निष्केषु भूषणेष्वसिचर्मसुतेषामादित्यवर्णाभा मरीच्यः प्रचकाशिरेcūḍāmaṇiṣu niṣkeṣu bhūṣaṇeṣvasicarmasuteṣāmādityavarṇābhā marīcyaḥ pracakāśireइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें