महाभारत 7.19.3
व्यूढानीकस्ततो द्रोणः पाण्डवानां महाचमूम्अभ्ययाद्भरतश्रेष्ठ धर्मराजजिघृक्षया
vyūḍhānīkastato droṇaḥ pāṇḍavānāṃ mahācamūmabhyayādbharataśreṣṭha dharmarājajighṛkṣayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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