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महाभारत 7.19.4
व्यूहं दृष्ट्वा सुपर्णं तु भारद्वाजकृतं तदाव्यूहेन मण्डलार्धेन प्रत्यव्यूहद्युधिष्ठिरः
vyūhaṃ dṛṣṭvā suparṇaṃ tu bhāradvājakṛtaṃ tadāvyūhena maṇḍalārdhena pratyavyūhadyudhiṣṭhiraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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