महाभारत 7.19.58
आ गुल्फेभ्योऽवसीदन्त नराः शोणितकर्दमेदीप्यमानैः परिक्षिप्ता दावैरिव महाद्रुमाः
ā gulphebhyo'vasīdanta narāḥ śoṇitakardamedīpyamānaiḥ parikṣiptā dāvairiva mahādrumāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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