महाभारत 7.20.33
वीरास्थिशर्करां रौद्रां भेरीमुरजकच्छपाम्चर्मवर्मप्लवां घोरां केशशैवलशाड्वलाम्
vīrāsthiśarkarāṃ raudrāṃ bherīmurajakacchapāmcarmavarmaplavāṃ ghorāṃ keśaśaivalaśāḍvalām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें