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महाभारत 7.20.47
तं द्रोणः सधनुष्कं तु साश्वयन्तारमक्षिणोत्स हतः प्रापतद्भूमौ रथाज्ज्योतिरिवाम्बरात्
taṃ droṇaḥ sadhanuṣkaṃ tu sāśvayantāramakṣiṇotsa hataḥ prāpatadbhūmau rathājjyotirivāmbarāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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