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महाभारत 7.21.3
स हि वीरो नरः सूत यो भग्नेषु निवर्ततेअहो नासीत्पुमान्कश्चिद्दृष्ट्वा द्रोणं व्यवस्थितम्
sa hi vīro naraḥ sūta yo bhagneṣu nivartateaho nāsītpumānkaściddṛṣṭvā droṇaṃ vyavasthitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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