महाभारत 7.22.24
काञ्चनप्रतिमैर्योक्त्रैर्मयूरग्रीवसंनिभाःद्रौपदेयं नरव्याघ्रं श्रुतकर्माणमावहन्
kāñcanapratimairyoktrairmayūragrīvasaṃnibhāḥdraupadeyaṃ naravyāghraṃ śrutakarmāṇamāvahan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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