महाभारत 7.22.39
इन्द्रायुधसवर्णैस्तु कुन्तिभोजो हयोत्तमैःआयात्सुवश्यैः पुरुजिन्मातुलः सव्यसाचिनः
indrāyudhasavarṇaistu kuntibhojo hayottamaiḥāyātsuvaśyaiḥ purujinmātulaḥ savyasācinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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