महाभारत 7.22.4कृष्णास्तु मेघसंकाशाः सहदेवमुदायुधम्भीमवेगा नरव्याघ्रमवहन्वातरंहसःkṛṣṇāstu meghasaṃkāśāḥ sahadevamudāyudhambhīmavegā naravyāghramavahanvātaraṃhasaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें