महाभारत 7.22.50
समुद्रसेनपुत्रं तु सामुद्रा रुद्रतेजसम्अश्वाः शशाङ्कसदृशाश्चन्द्रदेवमुदावहन्
samudrasenaputraṃ tu sāmudrā rudratejasamaśvāḥ śaśāṅkasadṛśāścandradevamudāvahan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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