महाभारत 7.24.17
तस्य नानदतः केतुमुच्चकर्त सकार्मुकम्क्षुराभ्यां पाण्डवश्रेष्ठस्तत उच्चुक्रुशुर्जनाः
tasya nānadataḥ ketumuccakarta sakārmukamkṣurābhyāṃ pāṇḍavaśreṣṭhastata uccukruśurjanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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