महाभारत 7.24.27
श्रुतकर्माणमायान्तं मयूरसदृशैर्हयैःचैत्रसेनिर्महाराज तव पौत्रो न्यवारयत्
śrutakarmāṇamāyāntaṃ mayūrasadṛśairhayaiḥcaitrasenirmahārāja tava pautro nyavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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