महाभारत 7.24.31प्रवपन्निव बीजानि बीजकाले नरर्षभद्रौणायनिर्द्रौपदेयं शरवर्षैरवाकिरत्pravapanniva bījāni bījakāle nararṣabhadrauṇāyanirdraupadeyaṃ śaravarṣairavākiratइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें