महाभारत 7.25.26
स विघातं पृषत्कानामङ्कुशेन समाचरन्गजेन पाण्डुपाञ्चालान्व्यधमत्पर्वतेश्वरः
sa vighātaṃ pṛṣatkānāmaṅkuśena samācarangajena pāṇḍupāñcālānvyadhamatparvateśvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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