महाभारत 7.26.5
स चापि द्विरदश्रेष्ठः सदाप्रतिगजो युधिसर्वशब्दातिगः संख्ये कृतकर्मा जितक्लमः
sa cāpi dviradaśreṣṭhaḥ sadāpratigajo yudhisarvaśabdātigaḥ saṃkhye kṛtakarmā jitaklamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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