महाभारत 7.28.24
एका मूर्तिस्तपश्चर्यां कुरुते मे भुवि स्थिताअपरा पश्यति जगत्कुर्वाणं साध्वसाधुनी
ekā mūrtistapaścaryāṃ kurute me bhuvi sthitāaparā paśyati jagatkurvāṇaṃ sādhvasādhunī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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