महाभारत 7.28.32
तथेत्युक्त्वा गता देवी कृतकामा मनस्विनीस चाप्यासीद्दुराधर्षो नरकः शत्रुतापनः
tathetyuktvā gatā devī kṛtakāmā manasvinīsa cāpyāsīddurādharṣo narakaḥ śatrutāpanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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