महाभारत 7.28.37
ततः पार्थो महाबाहुरसंभ्रान्तो महामनाःकुम्भयोरन्तरे नागं नाराचेन समार्पयत्
tataḥ pārtho mahābāhurasaṃbhrānto mahāmanāḥkumbhayorantare nāgaṃ nārācena samārpayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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