महाभारत 7.29.17
सकम्पनर्ष्टिनखरा मुसलानि परश्वधाःक्षुराः क्षुरप्रनालीका वत्सदन्तास्त्रिसंधिनः
sakampanarṣṭinakharā musalāni paraśvadhāḥkṣurāḥ kṣurapranālīkā vatsadantāstrisaṃdhinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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