महाभारत 7.29.29
सा हन्यमाना पार्थेन पुत्रस्य तव वाहिनीद्वैधीभूता महाराज गङ्गेवासाद्य पर्वतम्
sā hanyamānā pārthena putrasya tava vāhinīdvaidhībhūtā mahārāja gaṅgevāsādya parvatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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